सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

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साहित्य अकादमी और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कृत — अज्ञेय जी का नाम हिंदी साहित्य के अग्रणी रचनाकारों में स्वर्णिम अक्षरों से मुद्रित है।

‘अज्ञेय’ का जन्म 07 मार्च 1911 को कुशीनगर, देवरिया, उत्तरप्रदेश में हुआ। जन्म से लेकर प्रायः 4 वर्ष का समय (1911 से 1915) उन्होंने लखनऊ में बितायें। 1915 से 1919 तक श्रीनगर और जम्मू में रहे, जहा प्रारंभिक संस्कृत की शिक्षा उन्होंने घर में ही ली। तत्पश्चात 1919 में वो अपने पिता के पास नालंदा, बिहार आ गए। बिहार की पावन मिट्टी ही उनके हिंदी ज्ञानोपार्जन का केंद्र बनी।

सच्चिदानंद से अज्ञेय बनने की कथा —

उनके पिता का नाम ‘डा० हीरानन्द शास्त्री’ था। और ‘अज्ञेय’ का पूरा नाम ‘सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन’ था। दरअसल कवि के रूप में वो तब प्रख्यात नहीं थे। या यूँ कहे, वो अज्ञात थे। तब उस दौर में कवियों के लिए एक उपनाम लगाना जरूरी होता था, जिससे वो जाने जाते थे। जैसे पंत, निराला, दिनकर, गुप्त…। केन उपनिषद की ये पंक्तियाँ ‘जो उसको जानता है, उसके लिए वो अज्ञात है. जो उसको नहीं जानता उसके लिए वो ज्ञात है’ शायद उनके अज्ञेय हो जाने के पीछे की प्रेरणा रही हो।

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आज अज्ञेय की पुण्यतिथि पर उनकी सभी रचनाओं को हम यहाँ श्रेणीबद्ध रूप में प्रस्तुत कर रहे है।

कहानियाँ — विपथगा 1937, परम्परा 1944, कोठरीकी बात 1945, शरणार्थी 1948, जयदोल 1951
उपन्यास — शेखर एक जीवनी- प्रथम भाग(उत्थान)1941, द्वितीय भाग(संघर्ष)1944, नदीके द्वीप 1951, अपने अपने अजनबी 1961
निबंध संग्रह — सबरंग, त्रिशंकु, आत्मनेपद, आधुनिक साहित्य: एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल
यात्रा वृतान्त — अरे यायावर रहेगा याद? 1943, एक बूँद सहसा उछली 1960
आलोचना — त्रिशंकु 1945, आत्मनेपद 1960, भवन्ती 1971, अद्यतन 1971 ई.
डायरियां — भवंती, अंतरा और शाश्वती
संस्मरण — स्मृति लेखा
नाटक — उत्तरप्रियदर्शी
जीवनी — रामकमल राय द्वारा लिखित शिखर से सागर तक
कविता संग्रह — भग्नदूत 1933, चिन्ता 1942, इत्यलम्1946, हरी घास पर क्षण भर 1949, बावरा अहेरी 1954, इन्द्रधनुष रौंदे हुये ये 1957, अरी ओ करुणा प्रभामय 1959, आँगन के पार द्वार 1961, कितनी नावों में कितनी बार (1967), क्योंकि मैं उसे जानता हूँ (1970), सागर मुद्रा (1970), पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1974), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक पर छाया (1981), प्रिज़न डेज़ एण्ड अदर पोयम्स (1946 – अंग्रेजी में)

पुरस्कार/सम्मान —

1. साहित्य अकादमी आँगन के पार द्वार 1964
2. भारतीय ज्ञानपीठ कितनी नावों में कितनी बार 1978

04 अप्रैल 1987 को दिल्ली में उनका देहावसान हो गया। परन्तु जब-जब हिंदी साहित्य की बातें होंगी — ‘अज्ञेय’ का जिक्र किये बगैर अधूरी.. बहुत अधूरी रहेगी।

रौशन सिंह (मुख्य सम्पादक )– रेड पेपर्स

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4 Comments on “सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’”

  1. Bahut hi badhiya post likha hai sir aapne, agyeya ji hindi ke bahot bare kavi the.
    Sadar Naman 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

    1. धन्यवाद, रेड पेपर्स
      खुद पढ़ें, औरों को भी प्रेरित करे।

    1. धन्यवाद, रेड पेपर्स
      खुद पढ़ें, औरों को भी प्रेरित करे।

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