शरत के साथ बिताया कुछ समय — अमृतलाल नागर

याद आता है, स्‍कूल-जीवन में, जब से उपन्‍यास और कहानियाँ पढ़ने का शौक हुआ, मैंने शरत बाबू की कई पुस्‍तकें पढ़ डालीं। एक-एक पुस्‍तक को कई-कई बार पढ़ा और आज …

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प्रसाद : जैसा मैंने पाया — अमृतलाल नागर

प्रसादजी से मेरा केवल बौद्धिक संबंध ही नहीं, हृदय का नाता भी जुड़ा हुआ है। महा‍कवि के चरणों में बैठकर साहित्‍य के संस्‍कार भी पाए हैं और दुनियादारी का व्‍यावहारिक …

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सेवाग्राम के दर्शन — यशपाल

सन 1939 में दूसरा महायुद्ध आरंभ हुआ तो ब्रिटिश साम्राज्‍यशाही सरकार ने भारत की इच्‍छा के विरुद्ध भी देश को उस युद्ध में लपेट लिया। उस समय देश के सभी …

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