ईश्वर रे, मेरे बेचारे…! — फणीश्वरनाथ रेणु

अपने संबंध में कुछ लिखने की बात मन में आते ही मन के पर्दे पर एक ही छवि ‘फेड इन’ हो जाया करती है : एक महान महीरुह… एक विशाल …

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स्वर्ग में विचार-सभा

स्वर्ग में विचार-सभा — भारतेंदु हरिश्चंद्र

स्‍वामी दयानन्‍द सरस्‍वती और बाबू केशवचन्‍द्रसेन के स्‍वर्ग में जाने से वहां एक बहुत बड़ा आंदोलन हो गया। स्‍वर्गवासी लोगों में बहुतेरे तो इनसे घृणा करके धिक्‍कार करने लगे और …

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अशोक के फूल

अशोक के फूल — हजारी प्रसाद द्विवेदी

अशोक में फिर फूल आ गए है। इन छोटे-छोटे, लाल-लाल पुष्‍पों के मनोहर स्‍तबकों में कैसा मोहन भाव है ! बहुत सोच समझकर कंदर्प-देवता ने लाखों मनोहर पुष्‍पों को छोड़कर …

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bhishma ko kshama nahi kiya gaya

भीष्म को क्षमा नहीं किया गया — हजारी प्रसाद द्विवेदी

मेरे एक मित्र हैं, बड़े विद्वान, स्‍पष्‍टवादी और नीतिमान। वह इस राज्‍य के बहुत प्रतिष्ठित नागरिक हैं। उनसे मिलने से सदा नई स्‍फूर्ति मिलती है। यद्यपि वह अवस्‍था में मुझसे …

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