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विपात्र (लघु उपन्यास) — गजानन माधव मुक्तिबोध

लंबे-लंबे पत्तोंवाली घनी बड़ी इलायची की झाड़ी के पास जब हम खड़े हो गए तो पीछे से हँसी का ठहाका सुनाई दिया। हमने परवाह नहीं की, यद्यपि उस हँसी में …

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गुनाहों का देवता- धर्मवीर भारती

भाग 1 इस उपन्यास के नये संस्करण पर दो शब्द लिखते समय मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या लिखूँ? अधिक-से-अधिक मैं अपनी हार्दिक कृतज्ञता उन सभी पाठकों के …

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आँख की किरकिरी – चौथा भाग — रवींद्रनाथ टैगोर

अनुवाद — हंसकुमार तिवारी चौथा भाग रात के अँधेरे में बिहारी कभी अकेले ध्यान नहीं लगाता। अपने लिए अपने को उसने कभी भी आलोच्य नहीं बनाया। वह पढ़ाई-लिखाई, काम-काज, हित-मित्रों …

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आँख की किरकिरी – तीसरा भाग — रवींद्रनाथ टैगोर

अनुवाद — हंसकुमार तिवारी तीसरा भाग उस दिन फागुन की पहली बसंती बयार बह आई। बड़े दिनों के बाद आशा शाम को छत पर चटाई बिछा कर बैठी। मद्धिम रोशनी …

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आँख की किरकिरी – दूसरा भाग — रवींद्रनाथ टैगोर

अनुवाद — हंसकुमार तिवारी दूसरा भाग विनोदिनी जब बिलकुल ही पकड़ में न आई, तो आशा को एक तरकीब सूझी। बोली, “भई आँख की किरकिरी, तुम मेरे पति के सामने …

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आँख की किरकिरी – पहला भाग— रवींद्रनाथ टैगोर

अनुवाद — हंसकुमार तिवारी पहला भाग विनोद की माँ हरिमती महेंद्र की माँ राजलक्ष्मी के पास जा कर धरना देने लगी। दोनों एक ही गाँव की थीं, छुटपन में साथ …

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