रेड पेपर्स — यात्रा-क्रम (हमारे बारे में)

रेड पेपर्स – खुद पढ़ें। ..औरों को भी प्रेरित करे। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

यूँ तो स्कूल के दिनों से ही हिन्दी में मेरा रुझान रहा हैं। पहले गणित का विद्यार्थी और फिर बाद में मैनेजमेंट का दास होकर भी, मस्तिष्क वही हाई-स्कुल के दिनों वाली हिन्दी की कक्षाओं में अटका रहता था। नथुनी राय (गुरु जी) की पढ़ाई हिंदी थी जो कभी पीछा ही नहीं छोड़ती। तब तो कुछ विशेष सोचा न था और न कुछ विशेष आज ही सोच पाता हूँ। हाँ, किन्तु यह विचार अवश्य था कि यदि कभी किसी दिन किसी कहानी के लेखक बनने का गौरव प्राप्त हुआ तो बस जीवन मूल्य सार्थक हो जाये।

तब पूरी दुनिया इक्कीसवी सदी का स्वागत कर रही थी। इंटरनेट का प्रादुर्भाव तो अवश्य हो चुका था परन्तु आज की तरह आम जीवन को प्रभावित न कर सका था। लेकिन समय के साथ-साथ सब चीज़े बदलती चली गयी। पढ़ाई समाप्त कर आजीविका की काली और भयावह दौड़ में हम कितना भागे, कितना जीते ज्ञात नहीं परन्तु यह सर्वथा असत्य नहीं कि हिन्दी हाथ से फिसलती रही। कुछ देर अवश्य लगी सामंजस्य बिठाने में। और अंततः वेबसाइट के प्रारूप में 5-6 वर्ष पूर्व मैंने रेड पेपर्स की शुरुआत कर ही दी।

रेड पेपर्स सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, एक सुखद स्वप्न है जिसने अपने पीछे-पीछे मुझे दौड़ाया तो बहुत पर इसके पा जाने की दशा और इसके नशे की अनुभूति मेरे सिवा शायद ही कोई और कर सकता है। मेरे जीवन का शायद ही कोई ऐसा दिन निकलता है, जब मैं कम-से-कम एक बार यहाँ न आता होऊं।

हमारी पहल —

रेड पपेर्स की वेबसाइट के अलावा मैं यूट्यूब (YouTube) पर भी यथा-संभव सक्रिय रहता हूँ। अगर किसी कारणवश आप कहानियां या कविताएं पढ़ नहीं पाते तो आप उन सबका पाठ मेरे यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं। हमारे यूट्यूब चैनल देखने के लिए यहाँ क्लिक करे।

हमारा प्रयास —

रेड पेपर्स हिन्दी भाषियों के लिए शुरू की गयी गैर व्यावसायिक एवं स्व संचालित हिन्दी वेब पोर्टल है। जिसका उद्देश्य ‘हिन्दी साहित्य के समृद्ध इतिहास’ को जन साधारण तक शुद्ध रूप में पहुँचाना है। हमारा मुख्य प्रयास यही है कि आप अपने पसंदीदा लेखकों के सम्पूर्ण रचनाओं को पढ़ सके और इस प्रयास में हमें आपके सहयोग की आवश्यक आवश्यकता है। एक कवि बगैर श्रोताओं के और एक संपादक बगैर पाठकों के ठीक वैसा ही है जैसे यूट्यूब या फेसबुक बगैर इंटरनेट के।

आज रेड पेपर्स को तमाम हिन्दी प्रेमियों की जो प्रशंसा और प्यार मिल रहा है इसका श्रेय मैं अपने छोटे से समूह को देना चाहता हूँ, जो बगैर पारिश्रमिक के दिन-रात परिश्रम करके हिन्दी के रचनाकारों की रचनाएँ प्रकाशित कर आप तक पहुंचाते है।

अपना साथ और सहयोग बनाये रखे। बहुत-बहुत साभार ..
आपका बहुत ही अपना —
रौशन सिंह – (Chief Editor – RED PAPERS)
रेड पेपर्स
ई-मेल : RedPapersBlog@gmail.com

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