पहाड़ों को मेरे ऊपर गिरने दो – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

पहाड़ों को मेरे ऊपर गिरने दो नदियों को मुझे बहा ले जाने दो सागर को किनारे पर मुझे बार बार पटकने दो मै अपनी शक्ति की परीक्षा करना चाहता हूँ …

पूरा पढ़े

देह का संगीत – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

मूझे चूमो और फूल बना दो मुझे चूमो और फल बना दो मुझे चूमो और बीज बना दो मुझे चूमो और वृक्ष बना दो फिर मेरी छाँह में बैठ रोम …

पूरा पढ़े

देश काग़ज़ पर बना नक़्शा नहीं होता! – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों …

पूरा पढ़े

तुम्हारे हाथो में – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

एक रंग भरी कूची की तरह मैने खुद को तुम्हारे हाथों में दे दिया । तुम उससे अपनी एड़ियां रगड़ सकती हो और ऐसी भयानक आकृति भी बना सकती हो …

पूरा पढ़े

तुम्हारे साथ रहकर – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएं पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आंगन-सी बन गई है जो खचाखच …

पूरा पढ़े

कितना अच्छा होता है – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

कितना अच्छा होता है एक-दूसरे को बिना जाने पास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है,… उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं। …

पूरा पढ़े
swamini-premchand-kahani

स्‍वामिनी (मानसरोवर-1) — मुंशी प्रेमचंद

शिवदास ने भंडारे की कुंजी अपनी बहू रामप्यारी के सामने फेंककर अपनी बूढ़ी आँखों में आँसू भरकर कहा — “बहू, आज से गिरस्ती की देखभाल तुम्हारे ऊपर है। मेरा सुख …

पूरा पढ़े
shikar-premchand-kahani

शिकार (मानसरोवर-1) — मुंशी प्रेमचंद

फटे वस्त्रों वाली मुनिया ने रानी वसुधा के चाँद से मुखड़े की ओर सम्मान भरी आँखो से देखकर राजकुमार को गोद में उठाते हुए कहा, “हम गरीबों का इस तरह …

पूरा पढ़े
shanti-premchand-hindi-kahani

शान्ति (मानसरोवर-1) — मुंशी प्रेमचंद

स्वर्गीय देवनाथ मेरे अभिन्न मित्रों में थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो वह रंगरेलियाँ आँखों में फिर जाती हैं, और कहीं एकांत में जाकर जरा देर रो …

पूरा पढ़े
rasik-sampadak-premchand

रसिक संपादक (मानसरोवर-1) — मुंशी प्रेमचंद

‘नवरस’ के संपादक पं. चोखेलाल शर्मा की धर्मपत्नी का जब से देहांत हुआ है, आपको स्त्रियों से विशेष अनुराग हो गया है और रसिकता की मात्रा भी कुछ बढ़ गयी …

पूरा पढ़े